1 KM ऊंची बिल्डिंग में लोग रहेंगे कैसे? जेद्दा टॉवर के अंदर क्या-क्या होगा

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दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का नाम सुनते ही अभी भी ज्यादातर लोगों के दिमाग में दुबई का बुर्ज खलीफा आता है. लेकिन सऊदी अरब में बन रहा जेद्दा टॉवर पूरा होने के बाद इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारी में है. इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर से ज्यादा होगी. यानी यह पहली ऐसी इमारत होगी जो 1 किलोम...

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का नाम सुनते ही अभी भी ज्यादातर लोगों के दिमाग में दुबई का बुर्ज खलीफा आता है. लेकिन सऊदी अरब में बन रहा जेद्दा टॉवर पूरा होने के बाद इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारी में है. इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर से ज्यादा होगी. यानी यह पहली ऐसी इमारत होगी जो 1 किलोमीटर की ऊंचाई का आंकड़ा पार करेगी.

लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इतनी ऊंची बिल्डिंग बनाई कैसे जा रही है. असली सवाल है- इस 1 KM ऊंचे टॉवर के अंदर लोग करेंगे क्या? यहां कौन रहेगा और इतनी ऊंचाई तक पहुंचेंगे कैसे?

जेद्दा इकोनॉमिक कंपनी के मुताबिक इसमें 167 से ज्यादा मंजिलों की योजना है. ताजा निर्माण अपडेट के अनुसार 31 अगस्त 2026 तक टॉवर 454 मीटर और 113वीं मंजिल तक पहुंच चुका था.लेकिन इस टॉवर की असली दिलचस्पी सिर्फ इसकी ऊंचाई नहीं है. सवाल यह है कि इतनी ऊंचाई पर रहने और काम करने वाले लोगों की जिंदगी कैसी होगी?

जेद्दा टॉवर को सिर्फ ऑफिस बिल्डिंग के तौर पर नहीं बनाया जा रहा. यह एक मिक्स्ड-यूज टॉवर होगा. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसमें रेजिडेंशियल स्पेस, कमर्शियल और ऑफिस स्पेस, लग्जरी होटल और दुनिया के सबसे ऊंचे ऑब्जर्वेशन डेक की योजना है.

केओएनई की प्रोजेक्ट जानकारी के मुताबिक टॉवर में 318 अपार्टमेंट और 182 होटल रूम की योजना है. यानी इस 1 किलोमीटर ऊंचे स्ट्रक्चर में लोग सिर्फ काम करने नहीं, बल्कि रहने और ठहरने भी आएंगे.केओएनई एक फिनलैंड की लिफ्ट और एस्केलेटर बनाने वाली कंपनी है.

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यह दुनिया की बड़ी एलेवेटर और एस्केलेटर कंपनियों में शामिल है.जेद्दा टॉवर के मामले में कोन की भूमिका खास है, क्योंकि कंपनी टॉवर के लिए लिफ्ट और लोगों की आवाजाही से जुड़ा सिस्टम उपलब्ध करा रही है. आसान भाषा में कहें तो यह जमीन पर फैले किसी छोटे शहर की तरह नहीं, बल्कि ऊपर की तरफ बना एक वर्टिकल शहर होगा.

जेद्दा टॉवर को सिर्फ ऑफिस बिल्डिंग के तौर पर नहीं बनाया जा रहा. यह एक मिक्स्ड-यूज टॉवर होगा. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसमें रेजिडेंशियल स्पेस, कमर्शियल और ऑफिस स्पेस, लग्जरी होटल और दुनिया के सबसे ऊंचे ऑब्जर्वेशन डेक की योजना है.

केओएनई की प्रोजेक्ट जानकारी के मुताबिक टॉवर में 318 अपार्टमेंट और 182 होटल रूम की योजना है. यानी इस 1 किलोमीटर ऊंचे स्ट्रक्चर में लोग सिर्फ काम करने नहीं, बल्कि रहने और ठहरने भी आएंगे.इसे आसान भाषा में समझें तो यह जमीन पर फैले किसी छोटे शहर की तरह नहीं, बल्कि ऊपर की तरफ बना एक वर्टिकल शहर होगा.

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इतनी ऊंची इमारत में सबसे बड़ा सवाल है- ऊपर जाएंगे कैसे? जेद्दा टॉवर में इसके लिए हाई-स्पीड लिफ्ट सिस्टम लगाया जा रहा है. केओएनई के मुताबिक यहां कुल 67 लिफ्ट और एस्केलेटर से जुड़ा सिस्टम होगा. इनमें कुछ लिफ्टों की अधिकतम रफ्तार 10 मीटर प्रति सेकंड तक होगी.

यानी अगर आप इसे सिर्फ मंजिलों की संख्या से समझने की कोशिश करेंगे तो बात मुश्किल लगेगी. इतनी ऊंचाई वाली इमारत में लोगों की आवाजाही को संभालने के लिए लिफ्टों को भी उसी स्तर की तकनीक चाहिए.इतनी ऊंचाई पर लिफ्ट की रस्सी भी आम नहीं होगी

जेद्दा टॉवर की सबसे दिलचस्प इंजीनियरिंग तकनीकों में से एक अल्ट्रारोप है. केओएनई के मुताबिक यह पारंपरिक स्टील केबल के मुकाबले हल्की कार्बन-फाइबर आधारित होइस्टिंग तकनीक है.

कंपनी का कहना है कि यह तकनीक लिफ्ट को 1,000 मीटर तक की यात्रा के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है. जेद्दा टॉवर में चार लिफ्टों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा.

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जेद्दा टॉवर में सबसे ज्यादा आकर्षण वाली जगहों में इसका ऑब्जर्वेशन डेक होगा.केओएनई के मुताबिक दुनिया के सबसे ऊंचे ऑब्जर्वेशन डेक तक पहुंचने के लिए लिफ्ट को 630 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई तक जाना होगा. जेद्दा इकोनॉमिक कंपनी भी टॉवर में 360 डिग्री पैनोरमिक व्यू वाले ऑब्जर्वेशन डेक की बात करती है.कल्पना कीजिए, जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर खड़े होकर जेद्दा शहर और लाल सागर का नजारा देखना कैसा होगा.

1 किलोमीटर ऊंची बिल्डिंग में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उसका वजन नहीं है. इतनी ऊंचाई पर हवा का असर भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. काउंसिल ऑन वर्टिकल अर्बनिज्म के मुताबिक जेद्दा टॉवर में इतनी ऊंचाई के लिए विशेष स्ट्रक्चरल सिस्टम और विंड-इंजीनियरिंग रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया है. टॉवर का आकार भी ऊपर जाते-जाते लगातार पतला होता है, जिससे इसकी एयरोडायनामिक परफॉर्मेंस बेहतर रखने में मदद मिलती है.

आधिकारिक प्रोजेक्ट जानकारी के मुताबिक जेद्दा टॉवर में फोर सीजन्स होटल, अपार्टमेंट, ऑफिस स्पेस, सर्विस्ड अपार्टमेंट और लग्जरी कॉन्डोमिनियम शामिल होंगे. एक ही टॉवर में अलग-अलग तरह की जिंदगी देखने को मिलेगी. कोई यहां ऑफिस जाएगा, कोई होटल में ठहरेगा और कोई इसी टॉवर में अपना घर रख सकता है.यही चीज जेद्दा टॉवर को सिर्फ एक रिकॉर्ड-ब्रेकिंग बिल्डिंग से अलग बनाती है.

तो क्या यह सचमुच 'आसमान में बसा शहर' होगा?

काफी हद तक इसे ऐसा समझा जा सकता है. यहां होटल, घर, ऑफिस और मनोरंजन तथा व्यूइंग स्पेस एक ही ऊर्ध्वाधर ढांचे में होंगे.अगर प्रोजेक्ट योजना के मुताबिक पूरा हुआ, तो जेद्दा टॉवर सिर्फ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का रिकॉर्ड नहीं बनाएगा, बल्कि यह दिखाएगा कि भविष्य में शहरों को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊपर की तरफ कितना बसाया जा सकता है.

Original Source
https://www.aajtak.in/trending/story/jeddah-tower-1km-building-inside-hotel-homes-lift-observation-tstf-dskc-2657018-2026-09-30?utm_source=rss
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