पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचा स्टारशिप, 26 सैटेलाइट छोड़ने के बाद प्रशांत महासागर में हुआ ब्लास्ट

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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारशिप ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान में पहली बार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने के रास्ते तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की. इस दौरान उसने 26 स्टारलिंक सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में छोड़े. हालांकि, उड़ान के दौरान थ्रस्टर में खराबी आने से मिशन को तय समय से क...

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारशिप ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान में पहली बार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने के रास्ते तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की. इस दौरान उसने 26 स्टारलिंक सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में छोड़े. हालांकि, उड़ान के दौरान थ्रस्टर में खराबी आने से मिशन को तय समय से करीब 7 घंटे पहले ही खत्म करना पड़ा. इसके बाद स्टारशिप प्रशांत महासागर में उतरा, जहां वह ब्लास्ट कर गया.

स्टारशिप का यह मिशन करीब 10 घंटे तक चलने वाला था, लेकिन उड़ान 3 घंटे से कुछ ज्यादा समय में ही खत्म हो गई. सुपर हेवी बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप के एक थ्रस्टर ने काम करना बंद कर दिया. इसके चलते स्पेसएक्स ने तय उड़ान योजना में बदलाव करते हुए यान को हवाई के पास प्रशांत महासागर में उतारने का फैसला किया.

स्टारशिप के लिए यह उड़ान कई मायनों में खास थी. इससे पहले उसकी 13 टेस्ट उड़ानें हो चुकी थीं, लेकिन वह पहली बार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने वाले रास्ते तक पहुंचा. इस बार उसने न सिर्फ अंतरिक्ष में पहुंचने का लक्ष्य हासिल किया, बल्कि 26 सैटेलाइट भी सफलतापूर्वक तैनात किए. हालांकि, थ्रस्टर में आई खराबी के कारण वह अपनी पूरी उड़ान योजना पूरी नहीं कर सका. तय योजना के मुताबिक, उसे भारत के ऊपर से भी गुजरना था, लेकिन मिशन जल्दी खत्म होने के चलते ऐसा नहीं हो पाया.

SpaceX's Starship rocket has successfully reached orbit and deployed its V3 Starlink satellites into orbit for the first time, officially making this Starship's first revenue-generating flight, a major milestone for the company! Congrats @SpaceX team! Incredible achievement 🚀 pic.twitter.com/yhFQR7xpHY

स्पेसएक्स का 124 मीटर लंबा स्टारशिप-सुपर हेवी रॉकेट सोमवार को अमेरिका के टेक्सास स्थित स्टारबेस से लॉन्च किया गया. उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद सुपर हेवी बूस्टर स्टारशिप से अलग हो गया. इसके बाद स्टारशिप ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा जारी रखी. इस दौरान स्टारशिप ने 26 स्टारलिंक सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े. ये सैटेलाइट स्पेसएक्स के इंटरनेट नेटवर्क का हिस्सा हैं. कंपनी इनकी मदद से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाना चाहती है. सैटेलाइट छोड़ने का काम सफल रहा, लेकिन इसके बाद थ्रस्टर में आई खराबी ने मिशन की आगे की योजना पर रोक लगा दी.

स्टारशिप को अपनी तय उड़ान के दौरान पृथ्वी के चारों ओर कई चक्कर लगाने थे. इस रास्ते में उसे भारत के ऊपर से भी गुजरना था. हालांकि, थ्रस्टर में खराबी आने के बाद स्पेसएक्स ने मिशन को जल्दी खत्म करने का फैसला किया. इसके बाद स्टारशिप को हवाई के पास प्रशांत महासागर में उतारने की दिशा में भेजा गया, जहां उसका ब्लास्ट हुआ.

इस तरह स्टारशिप अपनी तय उड़ान पूरी नहीं कर सका. इसके बावजूद अंतरिक्ष में पहुंचना और 26 सैटेलाइट छोड़ना इस मिशन की दो अहम उपलब्धियां रहीं. वहीं, समय से पहले उड़ान खत्म होने से यह भी साफ हुआ कि स्टारशिप को पूरी तरह भरोसेमंद बनाने के लिए अभी और परीक्षण करने होंगे.

स्पेसएक्स स्टारशिप को ऐसे रॉकेट सिस्टम के रूप में तैयार कर रही है, जिसका बार-बार इस्तेमाल किया जा सके. कंपनी की योजना भविष्य में इसके जरिए इंसानों को चंद्रमा और मंगल तक भेजने की है. नासा ने भी अपने आर्टेमिस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने के लिए स्टारशिप के एक खास वर्जन को चुना है.

हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्टारशिप को अभी कई अहम पड़ाव पार करने होंगे. अंतरिक्ष में लंबे समय तक काम करना, एक यान से दूसरे यान में ईंधन भरना और सुरक्षित तरीके से वापस लौटना इनमें शामिल हैं. 14वीं टेस्ट उड़ान में मिली कामयाबी इस दिशा में एक अहम कदम है, लेकिन इंसानों को चंद्रमा तक ले जाने से पहले इन सभी क्षमताओं को सफलतापूर्वक साबित करना जरूरी होगा.

Original Source
https://www.aajtak.in/science/story/spacex-starship-first-orbital-flight-26-satellites-deployed-pacific-ocean-ntc-dhrj-dskc-2655891-2026-09-29?utm_source=rss
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