मगरमच्छ की नकली तस्वीर बनाकर भेजी, असली समझकर मचा हड़कंप... अब 7 साल तक की जेल!
सोचिए, आपने मोबाइल पर एआई की मदद से मगरमच्छ की एक ऐसी तस्वीर बना दी जो बिल्कुल असली लगे. फिर मजाक में वह तस्वीर अपने किसी दोस्त को भेज दी और कह दिया कि यह मगरमच्छ सच में नजर आया है. अगर ऐसा करने पर पुलिस और सरकारी अधिकारी मगरमच्छ की तलाश में जुट जाएं, तो? सिंगापुर में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. उसने एआई से मगरमच्छ की नकली तस्वीर बनाई और अपने साथी को भेज दी. उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि एक तस्वीर इतनी बड़ी परेशानी खड़ी कर देगी.
मामला सिंगापुर के पांडन जलाशय का है. रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल के ये लिन ने 20 अगस्त को अपने एक साथी को मगरमच्छ की तस्वीर भेजी. उसने बताया कि जलाशय में मगरमच्छ दिखाई दिया है. तस्वीर इतनी असली लग रही थी कि उसकी बात पर भरोसा कर लिया गया. इसके बाद यह जानकारी अधिकारियों तक पहुंची. फिर मगरमच्छ को खोजने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. यही नहीं, इलाके में होने वाली पानी की गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई. रोइंग और कैनोइंग जैसी गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी सतर्क किया गया.
अगले दिन खुल गया तस्वीर का राज अधिकारियों ने जब मामले की जांच की तो अगले ही दिन पता चल गया कि तस्वीर में दिख रहा मगरमच्छ असली नहीं था. दरअसल, ये लिन ने यह तस्वीर एआई की मदद से बनाई थी. यानी एक नकली तस्वीर को असली बताने की वजह से अधिकारी पूरा दिन मगरमच्छ खोजते रहे. मगरमच्छ नहीं मिला तो मामला तस्वीर बनाने वाले शख्स तक पहुंच गया. जांच में पुलिस ने तस्वीर को ये लिन से जोड़ लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, उसने अपने फोन से एआई से बनाई गई तस्वीरें और उससे जुड़ी जानकारी भी मिटा दी थी. इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया.
अब जेल जाने तक की नौबत ये लिन पर झूठी जानकारी देने और न्याय की प्रक्रिया में रुकावट डालने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उसने अदालत में इन आरोपों को स्वीकार करने की इच्छा जताई है. मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी. सिंगापुर के कानून के तहत इन आरोपों में दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. एक आरोप में अधिकतम 3 साल तक की जेल हो सकती है, जबकि दूसरे आरोप में अधिकतम 7 साल तक की जेल का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि उसे कितनी सजा मिलेगी.
एक तस्वीर और पूरा सिस्टम परेशान यह मामला बताता है कि एआई से बनाई गई तस्वीर कितनी असली लग सकती है. लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि ऐसी तस्वीर को बिना सोचे-समझे असली बताकर भेजना कितना भारी पड़ सकता है. ये लिन ने शायद इसे मजाक समझकर किया हो, लेकिन उसकी एक तस्वीर के कारण अधिकारियों को मगरमच्छ की तलाश करनी पड़ी और पानी से जुड़ी गतिविधियां रोकनी पड़ीं. यानी एआई से तस्वीर बनाना आसान है, लेकिन उसे असली बताकर किसी को गुमराह करना बड़ी मुसीबत बन सकता है.


