महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी बनीं स्वीडन की सांसद, नीला विखे पाटिल ने स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव
महाराष्ट्र के BJP मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी ने स्वीडन की राजनीति में बड़ी कामयाबी हासिल की है. नीला विखे पाटिल स्वीडन की संसद के लिए चुनी गई हैं. उन्होंने स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीता है. नीला ग्रीन पार्टी की नेता हैं. वह अब 349 सदस्यों वाली स्वीडन की संसद में नजर आएंगी.
दरअसल, नीला का महाराष्ट्र से पुराना रिश्ता है. उनका परिवार राज्य की राजनीति और शिक्षा से जुड़ा रहा है. उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं. उनके पिता अशोक विखे पाटिल शिक्षाविद हैं. नीला के चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं.
नीला का जन्म स्वीडन में हुआ था. हालांकि, उनके बचपन के शुरुआती साल महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीते. बाद में वह स्वीडन लौट गईं. यहीं से उन्होंने राजनीति में अपना करियर आगे बढ़ाया.
चुनाव जीतने के बाद नीला ने अपने दादा बालासाहेब विखे पाटिल को याद किया. उन्होंने कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि उनके दादा को उन पर गर्व होगा. नीला ने बताया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा उन्हें राज्य का बजट पढ़ने के लिए देते थे.
नीला कई साल से स्वीडन की राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के तौर पर काम किया. यहां उन्होंने वित्त, टैक्स और आवास से जुड़े मुद्दों पर काम किया.
Nila Vikhe Patil, a Green Party leader with roots in Maharashtra, has been elected to Sweden’s Parliament from Stockholm City. Nila entered the 349-member Riksdag as Sweden’s left-leaning Opposition secured a narrow majority. Born in Sweden, the 41-year-old spent her early years… pic.twitter.com/HGMSzGJwAt
इसके बाद नीला स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं. उन्होंने ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति में भी काम किया. वह स्वीडिश यंग ग्रीन्स और ग्रीन पार्टी की दूसरी इकाइयों से भी जुड़ी रही हैं. नीला ने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से पढ़ाई की है. उन्होंने अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की. इसके अलावा MBA की डिग्री भी हासिल की. उन्होंने मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई की है.
सांसद बनने के बाद नीला बच्चों के कल्याण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो वोट नहीं दे सकते. साथ ही वह स्टॉकहोम और स्वीडन के लिए योगदान देना चाहती हैं.
नीला ने भारत से अपने रिश्ते को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि वह भारत से बहुत प्यार करती हैं. देश से उनका गहरा जुड़ाव है. उनके कई करीबी भारतीय दोस्त भी हैं.
नीला के परिवार का महाराष्ट्र में राजनीति और शिक्षा के साथ सहकारिता आंदोलन से भी पुराना रिश्ता रहा है. उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी. नीला ने अपने दादा के साथ अपने रिश्ते को भी याद किया. उन्होंने बताया कि आखिरी सालों में उनके दादा लगभग हर हफ्ते उन्हें फोन करते थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने दादा की बहुत याद आती है.
स्वीडन के चुनाव में वामपंथी विचारों वाली चार विपक्षी पार्टियों को 176 सीटें मिली हैं. वहीं मौजूदा रूढ़िवादी सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियों को 173 सीटें मिली हैं. विपक्षी दलों को सिर्फ तीन सीटों का अंतर मिला है.
नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है. हालांकि, विपक्षी दलों के बीच भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं. ऐसे में नई सरकार बनाने के लिए एंडरसन को अलग-अलग पार्टियों से बातचीत करनी होगी.


