नोएल टाटा ने खोला मोर्चा, चंद्रशेखर का विरोध, अब IPO को लेकर मांगी रिपोर्ट!
टाटा ग्रुप एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. गुरुवार को एन चंद्रशेखरन एक बार फिर टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर अगले पांच साल के लिए चुने गए हैं, जबकि पिछले महीने के दौरान ही उन्होंने यह कहकर इस्तीफा दे दिया था कि वह अब एक्सटेंशन नहीं चाहते हैं और मौजूदा कार्यकाल ही पूरा करेंगे.
हालांकि, सभी बोर्ड मेंबर्स ने टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन को ही चुना है. सिर्फ नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बाद भी एन चंद्रशेखरन को फिर से टाटा संस का चेयरमैन अगले पांच साल के लिए नियुक्त किया गया है.
इस बीच, अब नोएल टाटा पूरी तरह एक्टिव हो चुके हैं और टाटा संस से एक रिपोर्ट मांगी है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस बोर्ड से पिछले ढाई सालों में कंपनी और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हुई बातचीत की पूरी जानकारी मांगी है. उन्होंने यह भी बताया है कि RBI के लेटर में लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है.
RBI की रिपोर्ट में टाटा संस के लिए क्या कहा गया? नोएल टाटा ने यह रिपोर्ट बोर्ड बैठक के दारान मांगा, जहां बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया. बोर्ड को दिए अपने बयान में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने RBI के 11 सितंबर, 2026 के लेटर का हवाला दिया. टाटा संस ने मार्च 2024 में अपने NBFCs रजिस्टर्ड सर्टिफिकेट स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस कदम को मंजूरी दे दी थी.
लेकिन RBI ने इसे रिजेक्ट कर दिया और अपने बयान में कहा कि टाटा संस द्वारा रजिस्टर्ड सर्टिफिकेट सरेंडर करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता है. RBI कंपनी को सलाह देता है कि वह ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFCs) पर लागू नियमों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए. जिसे लेकर नोएल टाटा ने कहा कि इसमें लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि इस लेटर में कोई खास कदम भी तय नहीं किया गया है और न ही यह कहा गया है कि टाटा संस ने उल्लंघन किया है.
सिर्फ लिस्टिंग ही एक रास्ता नहीं नोएल टाटा ने आगे कहा कि 11 सितंबर 2026 के पत्र में लाइसेंस सरेंडर के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया है, लेकिन मेरी समझ से इसमें यह नहीं कहा गया है कि लिस्टिंग होना ही एकमात्र विकल्प है. अभी भी काफी गुंजाइश है, और इस बोर्ड को उस गुंजाइश का उपयोग करना चाहिए, न कि उसे छोड़ देना चाहिए.
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा कि बोर्ड ने अभी तक आरबीआई के बयान का कानूनी प्रभाव, कंपनी से क्या करने की अपेक्षा की जाती है और कब तक, इस बारे में कोई राय नहीं बनाई है. नोएल टाटा ने कहा कि बोर्ड को सबसे पहले पिछले ढाई वर्षों में टाटा संस और आरबीआई के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इसमें पेश किए गए प्रस्ताव, मिली जानकारियां, विचारे गए विकल्प और अभी भी उपलब्ध विकल्प शामिल होने चाहिए.
नोएल टाटा ने कहा कि कंपनी को आगे क्या करना चाहिए, इस पर फैसला लेने से पहले बोर्ड को सोच-समझकर कानूनी सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ये कदम तुरंत उठाना आवश्यक है और हमें तुरंत शुरुआत करनी चाहिए.