ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की क्या स्थिति है? राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बताया
ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और सीजफायर की स्थिति को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान ने कई दौर की बातचीत की है. उन्होंने दावा किया कि जब पहली बार जंग शुरू हुई, उस समय भी ईरान बातचीत की मेज पर था और हमलों के बाद भी बातचीत के लिए वापस आया. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ये बातें 'आजतक' को दिए एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में कहीं.
इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन को दिए इस इंटरव्यू में कहा कि ईरान का पिछले 100 वर्षों में कोई आक्रामक पक्ष नहीं रहा है. लेकिन मौजूदा स्थिति में मुश्किल ये है कि बातचीत में समझौता होने ही वाला था कि दोबारा हमला हो गया, ऐसे में भरोसा कैसे किया जाए.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि 'जब पहली बार जंग शुरू हुई, उस समय भी ईरान बातचीत की मेज पर था और हमलों के बाद भी बातचीत के लिए वापस आया. दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते तक पहुंचने वाले थे, तभी दोबारा हमला हो गया. इसके बावजूद बातचीत जारी रही और एक समझ बनने के बाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए, लेकिन बाद में उसे तोड़ दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में बातचीत दोबारा कैसे शुरू की जाए और यह भरोसा कैसे किया जाए कि किए गए वादों का पालन होगा.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी ओर से युद्ध की कोई इच्छा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि ईरान पिछले 100 वर्षों में आक्रामक पक्ष नहीं रहा है. पेजेशकियान के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती दोबारा विश्वास कायम करने और किसी भी संभावित समझौते के पालन को सुनिश्चित करने की है.
ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मक्का समझौते और सऊदी अरब के साथ संबंधों को लेकर साफ किया कि ईरान सऊदी अरब के साथ युद्ध में नहीं है. उन्होंने हूती के हमलों को अलग मुद्दा बताते हुए कहा, 'हम सऊदी अरब के साथ युद्ध में नहीं हैं. हूतियों की अपनी समस्याएं हैं.' पेजेश्कियन ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों को एक साथ बैठकर शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए.
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इस क्षेत्र में आपसी संघर्ष का कोई कारण नहीं है. उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के देशों ने सैकड़ों वर्षों तक एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध किए, लेकिन बाद में साथ बैठकर नियम बनाए, एक-दूसरे के लिए रास्ते खोले और आपसी व्यापार तथा सहयोग को आगे बढ़ाया. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि हर देश अपने हितों, विचारों और पहचान को बरकरार रखते हुए सुरक्षा के एक साझा ढांचे के भीतर बातचीत और सहयोग कर सकता है.
पेजेश्कियन ने कहा कि युद्ध और संघर्ष किसी समस्या का समाधान नहीं हैं. सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और क्षेत्र के दूसरे देश अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए मिलकर एक मजबूत और गतिशील अर्थव्यवस्था खड़ी कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ईरान मानव एकता और क्षेत्रीय सहयोग में विश्वास करता है.


