रूई, फोम या कुछ और... क्या आप जानते हैं ट्रेन की सीट में क्या भरा होता है?
Indian Railway: जब भी हम ट्रेन में सफर करते हैं, तो सीट पर बैठते ही शायद ही कभी यह सोचते हैं कि आखिर इस सीट के अंदर क्या भरा हुआ है. सीट ऊपर से देखने में भले ही साधारण लगती हो, लेकिन इसे आरामदायक बनाने के लिए इसके अंदर खास तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रेन की सीट में रूई भरी होती है या फिर इसमें फोम का इस्तेमाल किया जाता है?
ट्रेन की सीट को मुलायम बनाने के लिए आमतौर पर सिर्फ रूई का इस्तेमाल नहीं किया जाता. अलग-अलग ट्रेनों और सीटों के डिजाइन के हिसाब से इनमें फोम, कुशनिंग मटेरियल और दूसरे सपोर्टिंग मटेरियल का इस्तेमाल किया जा सकता है. सीट के ऊपर कपड़े या विनाइल जैसी कवरिंग लगाई जाती है, ताकि वह लंबे समय तक इस्तेमाल के लायक बनी रहे. सीट के अंदर इस्तेमाल होने वाला मटेरियल ऐसा रखा जाता है, जिससे यात्री को लंबे सफर के दौरान ज्यादा परेशानी न हो. ट्रेन में रोजाना हजारों लोग बैठते हैं, इसलिए सीट को सिर्फ मुलायम बनाना ही काफी नहीं है. उसे मजबूत और टिकाऊ भी होना जरूरी है.
स्लीपर कोच की सीट क्यों अलग लगती है? अगर आपने ट्रेन के स्लीपर कोच में सफर किया है तो आपने देखा होगा कि सीट और बर्थ पर एक खास तरह की कुशनिंग होती है. दिन में यही सीट बैठने के काम आती है और रात में इसे बर्थ की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए इसके अंदर लगाया गया मटेरियल ऐसा होना चाहिए जो बार-बार इस्तेमाल के बावजूद जल्दी खराब न हो. इसी वजह से ट्रेन की सीट में इस्तेमाल होने वाला कुशन मटेरियल सामान्य घर के सोफे या गद्दे जैसा बिल्कुल नहीं होता. इसे ट्रेन के लगातार इस्तेमाल, वजन और सफर की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है.
सीट के नीचे सिर्फ कुशन नहीं होता ट्रेन की सीट को मजबूत बनाने में सिर्फ अंदर भरा हुआ फोम या कुशन ही काम नहीं करता. सीट के नीचे उसका बेस और सपोर्ट स्ट्रक्चर भी होता है. यही हिस्सा सीट को मजबूती देता है और यात्रियों का वजन संभालता है. इसके ऊपर कुशनिंग लगाई जाती है और फिर पूरी सीट को कवर से ढक दिया जाता है. यही वजह है कि सीट बाहर से देखने में एक साधारण कुशन जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे कई परतों का इस्तेमाल हो सकता है.
आखिर रूई क्यों नहीं भरी जाती? रूई काफी मुलायम होती है, लेकिन लगातार दबाव पड़ने पर वह अपनी शेप बदल सकती है और समय के साथ बैठ सकती है. ट्रेन की सीटों का इस्तेमाल हर दिन बहुत ज्यादा होता है. इसलिए ऐसी सामग्री ज्यादा उपयोगी होती है जो लंबे समय तक अपना आकार और मजबूती बनाए रख सके.
यानी अगली बार जब आप ट्रेन की सीट पर बैठें तो याद रखिए, उसके अंदर सिर्फ रूई भरकर उसे तैयार नहीं किया जाता. सीट को आरामदायक, मजबूत और लंबे समय तक इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए कुशनिंग मटेरियल, फोम और मजबूत सपोर्ट स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाता है. यही छोटी-सी चीज ट्रेन के लंबे सफर को यात्रियों के लिए थोड़ा आरामदायक बनाती है.
