नाराजगी, अखिलेश पर चुप्पी और फिर तबादला... यूं मान ली गई ओमप्रकाश राजभर की जिद
ओमप्रकाश राजभर की अपनी ही सरकार से नाराजगी और अखिलेश यादव के खिलाफ 10 दिनों की चुप्पी ने रंग दिखाया. आखिरकार ओमप्रकाश राजभर का दबाव काम आया और मुख्यमंत्री ने राजभर के पंचायती राज के प्रमुख सचिव अनिल कुमार को हटा दिया.
ओम प्रकाश राजभर अपने विभाग के प्रमुख सचिव से बेहद नाराज थे और खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे. वह उन्हें अपने विभाग से हटाने को लेकर आमादा थे. जब काफी दबाव के बाद भी उनके प्रमुख सचिव नहीं हटाए गए तो ओमप्रकाश राजभर ने नई रणनीति अपनाई और अखिलेश यादव के खिलाफ बोलना और ट्वीट करना लगभग बंद कर दिया था.
वह ओमप्रकाश राजभर, जिन्हें हर बार अखिलेश यादव के सामने बोलने के लिए खड़ा किया जाता रहा और जो अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर भड़ास निकालते रहे, 9 सितंबर से पूरी तरीके से शांत थे. 9 सितंबर के आखिरी ट्वीट में उन्होंने अखिलेश यादव के खिलाफ लिखा था- 'अखिलेश भाई! अपने 'अहीर’ और ‘जहीर' को कंट्रोल कीजिए महाराज. ये बहुत अति मचाये हुए हैं. समाज का तो अहित कर ही रहे हैं, आपको भी ये निपटा देंगे.' इस ट्वीट के बाद ओमप्रकाश राजभर बिल्कुल शांत थे और अखिलेश के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल रहे थे.
लगभग हर दिन अखिलेश यादव के खिलाफ कई-कई पोस्ट लिखने वाले ओमप्रकाश राजभर ने 9 सितंबर के बाद अखिलेश यादव के खिलाफ ना कुछ बोला, ना ही कुछ लिखा. अखिलेश यादव के खिलाफ बिल्कुल शांत हो जाने की उनकी रणनीति काम आई और मुख्यमंत्री ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उनके प्रमुख सचिव को बदल दिया.
यह भी पढ़ें: 'तो कुछ न कुछ सोचना पड़ेगा...', BJP से गठबंधन पर राजभर के बयान से खलबली
भाजपा पर नजर रखने वाले लोग यह मानने लगे थे कि ओमप्रकाश राजभर भीतर ही भीतर नाराज हो रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने अखिलेश यादव के खिलाफ लिखना और बोलना छोड़ दिया था.पहले से ही संजय निषाद की नाराजगी खुलकर सामने थी और अगर ओमप्रकाश राजभर ने भी योगी सरकार या भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया होता तो भाजपा मुश्किल में आ जाती.
ओमप्रकाश राजभर की चुप्पी ने जबर्दस्त दबाव का काम किया. सरकार ने आखिरकार कई प्रशासनिक तबादले किए, जिसमें ओमप्रकाश राजभर के प्रमुख सचिव भी बदल दिए गए. अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशारों में यह बात कही, पिछले 10 दिनों से होना तो कुछ बोल रहे हैं ना लिख रहे हैं, कहीं नाराज तो नहीं. अब देखना है कि क्या ओमप्रकाश राजभर दोबारा अखिलेश यादव पर हमलावर होते हैं या नहीं.