एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का क्या? रणबीर-रणवीर और विक्की पर फिल्ममेकर ने उठाए सवाल
फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने फिल्म इंडस्ट्री में लीड एक्टर की ऑन-स्क्रीन इमेज और प्रमोशन के लिए स्मोकिंग पर लगातार निर्भरता पर सवाल उठाए. रविवार को डायरेक्टर ने एक कोलाज शेयर किया जिसमें रणबीर कपूर (एक्शन ड्रामा 'एनिमल' में), रणवीर सिंह (आने वाली थ्रिलर 'धुरंधर' में) और विक्की कौशल (पीरियड ड्रामा 'लव एंड वॉर' में) अपने-अपने किरदारों के लुक में स्मोकिंग करते हुए दिखाए गए थे.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखते हुए, फिल्ममेकर ने थिएटर में अनिवार्य एंटी-स्मोकिंग डिस्क्लेमर और फिल्म के मार्केटिंग पोस्टर्स के बीच विरोधाभास पर चिंता जताई. उन्होंने मैसेजिंग में दिख रहे इस विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए पूछा, 'फिल्मों से पहले और उनके दौरान हमें जो खराब लगने वाली एंटी-स्मोकिंग रील देखनी पड़ती हैं, उनका क्या मतलब है, जबकि फिल्मों के पोस्टर ऐसे होते हैं?'
इस आलोचना का जवाब देते हुए, एक X यूजर ने डायरेक्टर की 2002 की एक्शन थ्रिलर 'कांटे' के गाने 'रामा रे' के बोल का जिक्र किया जिसमें स्मोकिंग का जिक्र था, और उनके रुख को विडंबनापूर्ण बताया. इस कमेंट का जवाब देते हुए, संजय ने उस दौर में अनिवार्य एंटी-स्मोकिंग डिस्क्लेमर न होने की बात कही. उन्होंने जवाब में लिखा, 'तब स्मोकिंग-विरोधी विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस.'
What is the point of those unpleasant anti smoking reels we have to endure before and during films when these are the posters of the films? pic.twitter.com/oQSkEWkTZl
कई यूजर्स ने उनकी चिंताओं का समर्थन किया और फिल्मों में तंबाकू के इस्तेमाल को सामान्य मानने की प्रवृत्ति पर व्यापक चर्चा शुरू की.
एक यूजर ने लिखा, 'यह एक मजाक है, यह नेटफ्लिक्स और एप्पल पर कोई शो देखने और शराब पीने के बारे में चेतावनी मिलने जैसा है.' एक अन्य यूजर ने कहा, 'स्मोकिंग और ड्रिंकिंग के सभी दृश्यों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. यही एकमात्र समाधान है. अगर कोई खुद की जान लेना चाहता है, तो यह उसकी सिरदर्द है, लेकिन किसी भी पब्लिक/मास मीडिया को अस्वास्थ्यकर प्रचार के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.'
There were no non smoking ads then you genius.
एक X पोस्ट में यह भी लिखा था, 'काम तो चलता रहेगा... एक बार शोर-शराबा कम हो जाएगा, तो पोस्टर पोस्टर ही रहेंगे और सिगरेट भी इमेज का हिस्सा बनी रहेगी. असली सवाल यह है कि क्या इस संदेश से वास्तव में कुछ बदलता है.'
हाल ही में CBFC के आए नियम यह आलोचना भारतीय सिनेमा में नशीले पदार्थों के चित्रण को लेकर कड़े नियमों के बीच आई है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने हाल ही में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत अधिसूचित संशोधित दिशानिर्देश पेश किए हैं. नए नियमों के तहत, नशीले पदार्थों को दिखाने वाली फिल्मों के लिए ड्रग्स-विरोधी चेतावनी दिखाना जरूरी कर दिया गया है.
साथ ही, हिंसा, संवेदनशील विषयों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर डालने वाले कंटेंट पर पहले से मौजूद पाबंदियों को और मजबूत किया गया है. नए नियमों के अनुसार, गैर-कानूनी ड्रग्स के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाने वाले सीन में स्क्रीन पर यह चेतावनी दिखानी होगी. 'गैर-कानूनी नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं. ड्रग्स को ना कहें.'
