लखनऊ में हैं टेढ़ी पुलिया और गड़बड़झाला जैसी जगहें, नाम सुनकर पूछेंगे- आखिर ऐसे नाम पड़े कैसे?
लखनऊ का नाम सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? नवाब, कबाब, चिकनकारी और तहजीब... है ना? लेकिन जरा रुकिए! इसी लखनऊ में कुछ ऐसी जगहों के नाम भी हैं, जिन्हें सुनकर आप एक बार जरूर पूछेंगे- ‘भाई, ये नाम रखा किसने था? सोचिए, कोई आपको बोले कि टेढ़ी पुलिया जाना है, तो आप रास्ता पूछेंगे या पहले पुलिया के टेढ़े होने की वजह जानेंगे? और अगर कोई कह दे कि गड़बड़झाला में मिलते हैं, तो नाम सुनकर ही लगेगा कि वहां पहुंचकर कहीं आप खुद गड़बड़झाले में न फंस जाएं!
यही नहीं, लखनऊ में नाका हिंडोला, भूतनाथ और बंदरिया बाग जैसे नाम भी हैं. इनमें कुछ नाम सुनकर हंसी आती है, कुछ हैरान करते हैं और कुछ के पीछे शहर के पुराने इतिहास और स्थानीय पहचान की कहानी छिपी है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये सिर्फ पुराने जमाने के नाम नहीं हैं. इनमें से कई जगहें आज भी लखनऊ की पहचान बनी हुई हैं. तो चलिए जानते हैं, लखनऊ की इन अजीबोगरीब नाम वाली जगहों का नाम आखिर पड़ा कैसे?
टेढ़ी पुलिया... सच में टेढ़ी थी पुलिया? लखनऊ की टेढ़ी पुलिया का नाम सुनते ही सबसे पहले यही सवाल आता है कि आखिर पुलिया टेढ़ी क्यों थी? आज टेढ़ी पुलिया सिर्फ कोई पुरानी पुलिया नहीं, बल्कि शहर के उत्तरी हिस्से का जाना-पहचाना चौराहा और इलाका है. कुर्सी रोड के पास स्थित इस जगह का नाम उस घुमावदार या टेढ़ी पुलिया से जुड़ा बताया जाता है, जो कभी यहां की पहचान हुआ करती थी. समय के साथ आसपास का इलाका काफी बदल गया, लेकिन नाम आज भी वही है. यानी पुलिया भले अपने पुराने रूप में न हो, लेकिन उसकी पहचान आज भी नाम में जिंदा है.
गड़बड़झाला... नाम ही ऐसा कि सुनते ही हंसी आए अब आते हैं गड़बड़झाला पर. नाम सुनकर लगता है कि यहां जरूर कुछ गड़बड़ होगी. लेकिन इसकी कहानी थोड़ी अलग है. अमीनाबाद में गड़बड़झाला बाजार आज भी मौजूद है. यहां की संकरी और घुमावदार गलियों में तरह-तरह की दुकानें हैं. खासकर आर्टिफिशियल जूलरी और छोटी-छोटी चीजों की दुकानों के लिए यह इलाका जाना जाता है. कहा जाता है कि गलियों और दुकानों के इस उलझे हुए जाल की वजह से इसका नाम गड़बड़झाला पड़ा. यानी नाम सुनकर जो तस्वीर दिमाग में आती है, वह यहां की गलियों से काफी हद तक मेल खाती है.
नाका हिंडोला... यहां सच में लगते थे हिंडोले? लखनऊ का नाका हिंडोला भी नाम के मामले में काफी दिलचस्प है. इस नाम में ‘हिंडोला’ शब्द अपने आप में लोगों की उत्सुकता बढ़ा देता है. स्थानीय इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पुराने समय में यहां पारंपरिक हिंडोले बनाने और चलाने वाले लोगों की मौजूदगी थी. त्योहारों और मेलों में इन हिंडोलों की खास जगह होती थी. धीरे-धीरे इलाके की पहचान ही नाका हिंडोला बन गई. आपको बता दें कि हिंडोला का मुख्य अर्थ झूला, पालना या गोल घूमने वाला झूला होता है.
आज हिंडोले वाली वो पुरानी पहचान भले दिखाई न दे, लेकिन नाका हिंडोला नाम आज भी शहर में इस्तेमाल होता है. यहां का ऐतिहासिक गुरुद्वारा भी इस इलाके की पहचान का अहम हिस्सा है.
भूतनाथ... क्या यहां भूतों का कोई संबंध है? अब नाम आता है भूतनाथ का. पहली बार सुनने वाला सोच सकता है कि शायद यह कोई डरावनी जगह होगी. लेकिन ऐसा नहीं है. लखनऊ के इंदिरा नगर में भूतनाथ बाजार और भूतनाथ मंदिर मौजूद हैं. यह नाम भगवान शिव के एक नाम ‘भूतनाथ’ से जुड़ा है. यानी इसका भूत-प्रेत वाली किसी कहानी से संबंध नहीं है. आज यहां बाजार भी है और इसी नाम से लखनऊ मेट्रो का स्टेशन भी है. यानी कभी धार्मिक पहचान से जुड़ा नाम आज शहर की रोजमर्रा की पहचान का हिस्सा बन चुका है.
बंदरिया बाग... नाम में बंदरिया क्यों? बंदरिया बाग भी लखनऊ के दिलचस्प नामों में शामिल है. नाम सुनते ही मन में बंदरों और किसी पुराने बाग की तस्वीर बन जाती है. लखनऊ के पुराने इलाकों के नामों को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस नाम का संबंध आसपास के चिड़ियाघर और वहां मौजूद बंदरों से जोड़ा जाता है. स्थानीय इस्तेमाल में ‘बंदरिया बाग’ नाम इतना चलन में आया कि यह इलाके की पहचान बन गया. यही लखनऊ की खासियत है.
लखनऊ की इन जगहों की कहानी बताती है कि किसी शहर को सिर्फ उसकी बड़ी इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों से नहीं जाना जाता. उसकी असली पहचान कई बार गलियों, बाजारों और मोहल्लों के नामों में छिपी होती है. टेढ़ी पुलिया किसी पुराने पुल की याद दिलाती है, गड़बड़झाला बाजार की उलझी गलियों की तस्वीर सामने लाता है, नाका हिंडोला पुराने हिंडोलों की याद से जुड़ा है और भूतनाथ धार्मिक परंपरा से. इनमें से कई जगहों का रूप आज पूरी तरह बदल चुका है, लेकिन उनके पुराने नाम अब भी लोगों की जुबान पर हैं.
यानी लखनऊ में अगली बार अगर कोई आपसे कहे कि ‘गड़बड़झाला जाना है’ या ‘टेढ़ी पुलिया से आगे जाना है’, तो इसे सिर्फ अजीब नाम मत समझिएगा. इन नामों के पीछे इस पुराने शहर की अपनी एक कहानी छिपी है.

