चार्ट बनने के बाद भी मिल सकता है ट्रेन का कन्फर्म टिकट! जानिए रेलवे का ये खास नियम
ट्रेन से सफर करने वालों के लिए टिकट कंफर्म होना सबसे बड़ी चिंता होती है. खासकर त्योहार, छुट्टियों या शादी के मौसम में कई ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है. कई बार यात्री टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं तो लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई देती है और उन्हें लगता है कि अब इस ट्रेन में सीट मिलना मुश्किल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के बाद भी टिकट बुक किया जा सकता है?
भारतीय रेलवे में इसके लिए करंट बुकिंग की सुविधा मौजूद है. इसके तहत चार्ट तैयार होने के बाद अगर ट्रेन में कोई सीट या बर्थ खाली रह जाती है, तो उसे दोबारा बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है. हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब वास्तव में कोई सीट उपलब्ध हो. रेलवे कोई नई सीट नहीं बनाता, बल्कि खाली बची सीट को ही बुक करने का मौका देता है.
चार्ट बनने के बाद सीट खाली कैसे हो जाती है? अब सवाल आता है कि जब ट्रेन का चार्ट बन गया, तो सीट खाली कैसे रह सकती है? दरअसल, कई बार कुछ यात्रियों का टिकट आखिरी समय में कैंसिल हो जाता है. कुछ मामलों में किसी यात्री का टिकट कंफर्म नहीं हो पाता या उपलब्ध बर्थ किसी वजह से खाली रह जाती है. ऐसी स्थिति में ट्रेन में कुछ सीटें खाली बच सकती हैं. इन्हीं उपलब्ध सीटों को करंट बुकिंग के तहत यात्रियों को बुक करने का मौका दिया जा सकता है. यानी चार्ट बनने का मतलब यह नहीं है कि ट्रेन की हर सीट हमेशा के लिए बंद हो गई.
करंट बुकिंग क्या होती है? करंट बुकिंग भारतीय रेलवे की ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए चार्ट तैयार होने के बाद भी उपलब्ध खाली सीटों पर टिकट बुक किया जा सकता है. रेलवे की गाइडलाइन के मुताबिक करंट बुकिंग में सिर्फ कंफर्म टिकट बुक किया जाता है. यानी अगर इस सुविधा के तहत सीट मिल रही है तो आपको कंफर्म सीट या बर्थ मिलेगी. वेटिंग लिस्ट या आरएसी टिकट की तरह आपको इंतजार नहीं करना होगा.
क्या चार्ट बनने के बाद हर ट्रेन में टिकट मिल जाएगा? यह समझना बहुत जरूरी है. करंट बुकिंग का मतलब यह नहीं है कि चार्ट बनने के बाद हर ट्रेन में सीट मिल जाएगी. यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उस ट्रेन में उस समय कोई सीट या बर्थ खाली है या नहीं. इसके अलावा उपलब्धता ट्रेन, यात्रा की तारीख और आपके सफर के स्टेशन पर भी निर्भर करती है. किसी ट्रेन में सीट खाली हो सकती है, लेकिन आपके स्टेशन से आपके डेस्टिनेशन तक उस हिस्से में सीट उपलब्ध न हो. इसलिए हर ट्रेन में करंट बुकिंग का आप्शन या कंफर्म सीट मिलना जरूरी नहीं है.
अब आप सोच रहे होंगे रि अगर पहले वेटिंग लिस्ट दिख रही थी तो बाद में कंफर्म टिकट कैसे मिल सकता है? मान लीजिए आपको दिल्ली से लखनऊ जाना है. आपने कुछ घंटे पहले टिकट चेक किया और ट्रेन में लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई दे रही थी. ऐसे में आपने टिकट बुक नहीं किया. बाद में कुछ यात्रियों ने अपनी टिकट कैंसिल कर दी. चार्ट तैयार होने के बाद कुछ सीटें खाली बच गईं. ऐसी स्थिति में रेलवे उन खाली सीटों को करंट बुकिंग के तहत उपलब्ध करा सकता है. अब अगर आप दोबारा टिकट चेक करते हैं और सीट उपलब्ध है, तो आपको पक्का टिकट मिल सकता है. यानी पहले सीट उपलब्ध न होने का मतलब यह नहीं है कि बाद में भी सीट नहीं मिलेगी.
करंट बुकिंग में कौन-सा टिकट मिलता है? रेलवे की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार करंट बुकिंग में सिर्फ कंफर्म ई-टिकट बुक किया जा सकता है. इस सुविधा के तहत सामान्य तौर पर यात्री को उपलब्ध सीट या बर्थ ही दी जाती है. इसके अलावा करंट बुकिंग के टिकट में कुछ बदलावों की सुविधा जनरल बुकिंग से अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, इस बुकिंग के बाद चढ़ने वाले स्टेशन, नाम, उम्र या लिंग में बदलाव की अनुमति नहीं होती.
चार्ट बनने के बाद टिकट बुक करने वालों के लिए जरूरी बात अगर आपकी ट्रेन में पहले टिकट उपलब्ध नहीं था, तो ट्रेन रवाना होने से पहले एक बार फिर सीट की उपलब्धता जरूर चेक कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ इस उम्मीद में अपनी यात्रा की योजना न बनाएं कि चार्ट बनने के बाद सीट जरूर मिल जाएगी. करंट बुकिंग पूरी तरह उपलब्ध खाली सीटों पर निर्भर करती है. अगर सीट उपलब्ध होती है तो बुकिंग का मौका मिल सकता है और अगर कोई सीट खाली नहीं है तो करंट बुकिंग से भी टिकट नहीं मिलेगा.
क्या चार्ट बनने के बाद भी टिकट कैंसिल कर सकते हैं? यहां करंट बुकिंग और सामान्य टिकट को अलग-अलग समझना जरूरी है. रेलवे के अनुसार सामान्य ई-टिकट को चार्ट तैयार होने के बाद ऑनलाइन सामान्य तरीके से कैंसिल नहीं किया जा सकता. ऐसी स्थिति में लागू नियमों के मुताबिक टिकट जमा रसीद यानी टीडीआर के जरिए किराया वापस लेने का दावा करना पड़ सकता है. इसलिए टिकट बुक करने से पहले यात्रा की तारीख, ट्रेन और यात्री की जानकारी अच्छी तरह जांच लेना जरूरी है.
यात्रियों के लिए क्या है फायदा? करंट बुकिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे ट्रेन की खाली सीटें बेकार जाने से बच सकती हैं और आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने का मौका मिलता है. यानी अगर किसी ट्रेन में चार्ट बनने के बाद कुछ सीटें खाली रह गई हैं, तो रेलवे उन्हें उपलब्ध कराकर उन यात्रियों को मौका दे सकता है जिन्हें अचानक यात्रा करनी है.
तो अगली बार क्या करें? अगर आपकी ट्रेन में टिकट बुक करते समय सीट नहीं मिल रही है या वेटिंग लिस्ट में दिखाई दे ही है, तो यात्रा से पहले एक बार दोबारा सीट की उपलब्धता चेक करें. खासकर चार्ट तैयार होने के बाद करंट बुकिंग में कोई पक्की सीट उपलब्ध है या नहीं, यह देखा जा सकता है. हालांकि, इसे टिकट कंफर्म होने की गारंटी न समझें. सीट तभी मिलेगी जब ट्रेन में वास्तव में कोई बर्थ या सीट खाली उपलब्ध होगी.

